रामायण सीरियल का पुनः प्रसारण…

हरि अनन्त, हरि कथा अनन्ता।

कहहिं, सुनहिं, बहुबिधि सब संता।।

दूरदर्शन द्वारा 33 वर्षों बाद लॉकडाउन अवधि में रामायण सीरियल का पुनः प्रसारण किया गया । लॉकडाउन के 40 दिन कैसे निकल गए पता ही नही चला। पूरी दिनचर्या प्रसारण समय के अनुसार सेट हो गई । उत्तर रामायण के सभी एपिसोड रिपीट किए गए वो सभी रिपीट एपीसोड भी उतनी ही शिद्दत के साथ देखे और हमेशा ऐसा लगता रहा कि इसका प्रसारण अनवरत चलता रहे । सीरियल खत्म होने पर मन बहुत भावविभोर हो रहा है ।
रामायण को तब और अब देखने में बहुत बड़ा फर्क लगा वो यूँ कि तब मैं कॉलेज में पढ़ रही थी और संस्कृति की इतनी समझ भी न थी । अभी भी सब वही है पर उम्र के साथ देखकर समझने , आत्मसात करने की क्षमता बढ़ गई है । कुछ प्रसंग और पात्र जैसे पुष्प वाटिका में सीता जी का राम को देखने जाना, रामविवाह, केवट प्रसंग, निषादराज, भरत मिलाप, पुष्पक विमान में सीता हरण के वक्त जटायु द्वारा बचाने का प्रयास , लक्ष्मण और हनुमान जी की भक्ति, वाल्मीकि आश्रम में सीता जी का रहना,लव कुश तो मानस पटल पर सदा के लिए अंकित हो गए ।इसके साथ ही मेघनाद, कुम्भकर्ण के पात्रों ने भी छाप छोड़ी।
आज लव कुश द्वारा भगवान श्रीराम जी के समक्ष एक गीत के माध्यम से रामायण का कुछ भाग और अपना परिचय देने का जो सजीव चित्र रखा गया उसने आंखे सजल कर दी …. !! इस अत्यन्त भावुक कर देने वाले दृश्य के साथ ही धारावाहिक “रामायण” का अन्त हुआ लेकिन अपने पीछे छोड़ गया
एक ‘पाठ’ ……
पाठ हमारी संस्कृति का ,
धर्म का ,मर्यादा का ,
परम्परा का ,मान सम्मान का , आचरण का …..!!
हमारी सम्पूर्ण शिक्षा का सार हमारे रामायण महाकाव्य में है । रामानंद सागर जी ने टीवी सीरियल के जरिए जिस प्रकार जन जन तक इसे पहुंचाने का काम किया वह बेहद सराहनीय है । सागर जी ने हर एक पात्र को सांचे में ढालकर बहुत ही गज़ब प्रस्तुति दी है ।रामायण का ऐसा सुंदर फिल्मीकरण दोबारा कभी नहीं हो सकता। आज बेहतर तकनीक है और भी कई चीजें बेहतर है 1987 की तुलना में सब कुछ बेहतर है लेकिन आज आपको न तो पात्रों के चयन के लिए अरुण गोविल मिलेंगे, न दीपिका चिखलिया मिलेंगी… न दारा सिंह और न अरविन्द त्रिवेदी… न सुनील लाहिरी और न विजय अरोड़ा… न ललिता पवार और न ही रवीन्द्र जैन मिलेंगे… और भी जाने क्या-क्या रामायण के इस रूप के साथ सम्पूर्ण है… इसे बेहतर करने की कोशिश इसे खराब करना ही होगी…।
आज रामायण सीरियल तो खत्म हुआ पर लॉक डाउन के इस समय में रामायण का आना और नई पीढ़ी द्वारा भी इस रामायण को देखना, इससे हमारी नई पीढ़ी भी बहुत लाभान्वित हुई । साथ ही यह सीरियल नयी युवा पीढ़ी के लिए यह एक जिम्मेदारी भी छोड़ गया है , जिम्मेदारी……..
अपनी संस्कृति को इसी प्रकार बनाए रखने की …
धर्म, परम्परा ,मान मर्यादा , प्रतिष्ठा को समझने की …
उसी के अनुकूल अपना आचरण करने की …..
आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति के इस मार्ग पर चलने की …..।
जैसे घर को साफ रखने के लिये नित्य ही झाडू-पोछा करना पडता है अन्यथा कुछ ही दिनों में घर धूल-धक्कड से भर जाता है वैसे ही मानव मस्तिष्क को सदैव परिष्कृत करते रखने की आवश्यकता होती है जिसके लिये अच्छा देखना,सुनना और पढना बहुत आवश्यक होता है । रामायण देखकर एक बार फिर उच्च आदर्शों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा मिली ।
धन्यवाद दूरदर्शन को जिसने इस विपदा के समय सभी भारतीयों को साक्षात श्री राम के सम्पूर्ण जीवन का दर्शन कराया । उम्मीद है समय-समय पर यूँ ही पुनः प्रसारण होता रहेगा ताकि हमें अपने जीवन में इसका सदैव स्मरण रहे ।
धन्यवाद पूरी रामायण की टीम को जिनके द्वारा प्रभु राम , माता सीता एवं अन्य का साक्षात रुप धारण कर आलौकिक दर्शन कराया ।
धन्यवाद श्री अरुण गोविल जी को भी, जिन्होंने अपने पेज पर रामायण के हर एपिसोड के प्रसारण के बाद उस एपिसोड की 5 मिनिट की विवेचना में उस एपिसोड का सार और उसमे निहित अर्थ बताए । जिससे सीरियल देखने में और रोचकता बढ़ी और समझने में सरलता आई।
रामायण भारतीय संस्कृति का सबसे मजबूत और प्रामाणिक दस्तावेज है। इस दस्तावेज़ को रामानंद सागर जी द्वारा धाराविक रूप में चित्रण करना वाकई प्रेरणादायक है और इसकी सजीव छाया हमारे मन में हमेशा जिंदा रहेगी ।
03.05.2020 ऋतु नायक

रामायण सीरियल का पुनः प्रसारण…&rdquo पर एक विचार;

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