जीवन एक यात्रा….


हमारा जीवन एक निरन्तर चलने वाली यात्रा है । यहाँ हर किसी को अलग अलग परिस्थितियों में जीवन यात्रा करनी होती है।
इस यात्रा में यह ज़रूरी नहीं होता कि यात्रा में आने वाला हर इंसान आपका हमेशा के लिए सहयात्री बने । इस यात्रा के हर कदम पर एक नया मोड़, नया पात्र, एक नया अनुभव आपका इंतज़ार कर रहा होता है। हमें इस संपूर्ण यात्रा में अपना कर्म करना होता है।
प्रकृति के नियम के अनुसार यहाँ छोटी से छोटी घटना भी किसी कारण से होती है बगैर कारण के कुछ घटित नहीं होता ।
जैसे किताब में आने वाली घटनाओं पर लेखक के सिवा किसी का बस नहीं उसी तरह हमारे जीवन की यात्रा में आने वाली घटनाओं पर हमारा बस नहीं होता । अगर किसी चीज़ पर हमारा बस है तो वो है हमारे अनुभव , जो ज़िन्दगी ने हमें देती हुई चलती है और कुछ सबक जो हम सीखते हुए चलते हैं । हमारे इस जीवन की शुरुआत में आने वाले सहयात्री अंत तक हमारा साथ नहीं देते। कुछ हमें बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं कुछ को हम ही पीछे छोड़ आते हैं, कुछ हमें याद आते हैं, कुछ को हम भूल जाते हैं । इस यात्रा के सफर में कहीं खुशियाँ तो कहीं पर ग़म मिलते हैं लेकिन यही इस यात्रा का आनन्द है । जीवन यात्रा में हर तरह के मौसम हमें विभिन्न प्रकार के अनुभव देते हैं ।

हमें निरन्तर चलते रहना जरूरी है ।अगर हम रुक कर एक जगह बैठ जाएंगे तो अगले पड़ाव पर मिलने वाले अनुभवों और आश्चर्यों से वंचित रह जाएंगे । जब मनुष्य सिर्फ एक जगह स्थिर होकर सोचना शुरू कर देता है तो उसकी सोच का दायरा और व्यवहार सीमित हो जाता है। सोच का दायरा सीमित होने की वजह से उसके सामाजिक चरित्र और व्यवहार में भी ठहराव आना शुरू होता है। अंततः वह स्वयं सीमित हो जाता है ।

जीवन चलने का नाम , चलते रहो सुबह- शाम …….. यह फिल्मी गीत जीवन की गति की ओर इशारा करता है। जीवन में उतार- चढ़ाव तो आते रहते हैं पर हम जो भी दिशा चुनते हैं उस पर चलने का अर्थ हो – अपनी शक्तियों का सदुपयोग करना। उन्नति के लिए निरन्तर कर्म करते करना, विकास की ओर उन्मुख होना और सुव्यवस्थित जीवन बिताना ।
इस यात्रा में मिलने वाले हर किरदार और घटना की भी अपनी अहमियत है,ना कोई किसी से ज़्यादा ज़रूरी है और ना कोई किसी से कम । हर सहयात्री का अपना किरदार और समय होता है । हमारी जीवन यात्रा में वह अपनी भूमिका निभाता है और भूमिका खत्म होने के बाद उसे हमारी यात्रा से जाना होता है। ना हम उसके आने का वक़्त तय करते हैं और ना जाने का । जीवन में उसकी आवश्यकता ही उसका निर्धारण करती है। ज़रूरी ये नहीं कि कब तक और किसके साथ आपकी यात्रा जारी रही । पर ज़रूरी ये है कि आपने इस यात्रा में अपने किरदार को पूर्णतः जिया या नहीं। इस यात्रा में कितने ही सफर हमें सिर्फ अकेले ही तय करने होते हैं। नई राहें अपनानी होती हैं । उन राहों पर हमें हमारी सकारात्मक सोच से आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है । इस यात्रा में जब तक आप चल रहे हैं तब तक आप खुलकर इस यात्रा का आनंद भी उठाते चलें वरना समय का क्या भरोसा और हमारी जीवन यात्रा कहाँ जाकर रुक जाए।
कभी कभी तो मुझे यह महसूस होता है कि जीवन यात्रा के सफर में आए मुकामों को तय कैसे किया जाए इसका ज्ञान जब होता है तब तक यह सफर समाप्ति की ओर आ गया होता है । आपकी पद प्रतिष्ठा के कारण आपको जीवन में बहुत सारे लोग सम्मान और आदर देंगे परन्तु हमारे इस जीवन की यात्रा समाप्त होने के बाद हमारे कर्म ही याद रखें जाएंगे । हम समय के साथ विलीन हो जाएंगे लेकिन जो भूमिका हमने निभाई और उसके कारण मिलने वाला सम्मान और आदर ही हमारे जीवन की शाश्वतता का प्रमाण है ।

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार किसी एक की जीवन यात्रा सिर्फ वर्तमान एक जन्म की नहीं अपितु कितने ही बीते हुए जन्मों और आने वाले जन्मों की यात्रा होती है। हमारी यात्रा अनन्त है ।

आपके जीवन की इस यात्रा पर आप सकारात्मक सोच के साथ उन्नति के लिए निरन्तर कर्म करते रहें , विकास की ओर उन्मुख रहकर अपना जीवन सुव्यवस्थित बिताएं , ऐसी मेरी शुभकामनाएं है…….।

ऋतु नायक

3 विचार “जीवन एक यात्रा….&rdquo पर;

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