पर्यावरण की पुनर्कल्पना करें, फिर से बनाएं और पुनर्स्थापित करें…….

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यह आपकी दुनिया है, यह मेरी दुनिया है, यह हमारी दुनिया है.!! प्रकृति ..सबसे अविश्वसनीय उपहार जो हम सभी साझा करते हैं। जन और जीवन की रक्षा के लिए जल, जंगल, ज़मीन का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक होता है। इन सभी का रक्षण-संवर्धन सरकार के साथ हम पर भी है। पेड़ों की कमी के कारण वर्षा भी अनियंत्रित व अनियमित हो रही है और विश्व भर में आ रहीं प्राकृतिक आपदाओं का मूल कारण भी यही है। बात सिर्फ जंगल के पेड़ों पौधे की भी नही है असली बात है जंगल के अंदर रह रहे असंख्य जीवों, उनके घरों और उनकी सांस्कृतिक समृद्धता की भी है। ध्यान में रखने योग्य बात यह है कि एक पेड़ 230 लीटर ऑक्सिजन एक दिन में वायुमंडल में छोड़ता है जो सात मनुष्यों को जीवन देने का काम करती है। वन्य पशु-पक्षियों जिनका जीवन ही जंगल हैं और जो मनुष्य के जैसे ही प्रकृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि इसी प्रकार प्रकृति का दोहन होता रहा तो भविष्य में हमारी भावी पीढ़ियां कंधों पर आक्सीजन सिलेंडर लेकर चलेंगी। आक्सीजन की महत्ता हमने मार्च 2021 से प्रत्यक्ष रूप से देखी व भुगती है। सही मायनों में यदि वास्तविकता से जीवन को समझा जाए तो प्रकृति ने हमें जिस प्रकार जीवन दिया है और जीवन के बढ़ने के लिए प्राकृतिक भोजन हवा जल और पर्यावरण में अनेकों सहायक तत्व दिए हैं उनका स्थान मानव निर्मित कोई भी चीज नहीं ले सकती और जो व्यक्ति इस सत्य को समझ लेता है उसे किसी प्रकार के कृत्रिम रसायनों की आवश्यकता नहीं होती। हमारे पर्यावरण को बहाल करने और सुरक्षित रखने में सहायता प्रदान करने वाले कुछ उपायों को अपनी रोजमर्रा जिंदगी में शामिल करें, जैसे 1.वृक्षारोपण करके 2.पानी पर्याप्त मात्रा में उपयोग करके, व्यर्थ होने से बचाकर 3.ऊर्जा संरक्षण करके 4.जैव प्रदूषित कचरे और गैर-जैव प्रदूषित कचरे को अलग-अलग रखकर 5.वस्तुओं की recycling & reuse करके 6.सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का उपयोग करके 7.प्लास्टिक के उपयोग को कम करके विशेषकर एक बार में उपयोग आने वाली प्लास्टिक की तिलांजलि देकर 8. अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण, पर्यावरण का सम्मान करना , उपरोक्त सभी कार्यों को हम अपनी दैनिक दिनचर्या का अंग बनाएं।आपने महसूस किया होगा कि पहाड़ी स्थलों या समुद्र तटों पर जितना आनंद हमें पहले प्राप्त होता था उतना अब नहीं होता कारण वही प्रकृति का दोहन । अगर हम अपने पर्यावरण की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित करने में सक्षम नहीं हो पाए, तो वे हमसे प्रश्न करेंगी कि आपने पर्यावरण के खिलाफ खिलवाड़ क्यों किया, जिसने पृथ्वी की पारिस्थितिकी को ही बदल दिया। तो आइए बात करना और प्रकृति से लेना बंद करके देना और करना शुरू करें। सरल कदम स्थायी परिवर्तन ला सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण एक ऐसा कार्य है जो प्रगति पर है,चलिए आज से ही शुरू करते हैं और जो शुरुआत कर चुके हैं वे उन सभी कार्यों को करना जारी रखते हैं । हममें से हर एक को स्वयंसेवी संस्थाओं या समुदाय द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों के प्रति (साप्ताहिक या मासिक जैसा सम्भव हो ) कुछ समय निकालना चाहिए। ये संगठन /समुदाय आज-कल पर्यावरण में आने वाली समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाने में सहायता कर रहे हैं। पर्यावरण की इस मुहिम में हमें अपनी इच्छा से शामिल होना बहुत जरूरी है, क्योंकि एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण के बिना हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
जल है तो जीवन है,
जीवन है तो पर्यावरण है,
पर्यावरण से ये धरती है,
और इस धरती से हम सब है।


पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंतित न हों ,सक्रिय हों ।डरपोक नहीं,साहसी बनें,

🌍🌿🌿🌿🌿🌿विश्व पर्यावरण की शुभकामनाएं🌿🌿🌿🌿🌿🌎

बची रहे पृथ्वी…🌱🌱🌱

स्कूल में सिखाई जाने वाली एक बात मुझे आज याद आ रही है जब हमें सिखाया जाता था कि पृथ्वी की ऐसी ही स्थिति रही तो देखना एक दिन पानी भी खरीदना पड़ेगा तब हम सबने इस बात को मज़ाक में उड़ा दिया था लेकिन आज सचमुच बंद बोतल में पानी बिक रहा है और तो और आज तो उससे भी भयावह स्थिति से हम गुजर रहे हैं । जो हवा प्रकृति हमे निःशुल्क देती है वो हवा (आक्सीजन) भी अब बिकनी शुरु हो गई है लोग आक्सीजन सिलेंडर के लिए भाग रहे हैं …!! ये सब बातें इंगित करती हैं कि हम हर बीतते दिन के साथ जलवायु संकट से जूझ रहे हैं। ये दिवस हमें ये चेतावनी दे रहा है कि आज जिन समस्याओं से मानव जीवन गुजर रहा है वो भविष्य में और भयावह होंगी अगर हम धरा के प्रति सचेत न रहे तो सब कुछ धरा का धरा रह जायेगा |
आज एक कोरोना नामक बीमारी ने संसार की सम्पूर्ण मानव प्रजाति को हिला के रख दिया है ,सभी जगह ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है । इसी तरह कल अनेकों बीमारी जन्म लेंगी इसलिये अभी भी वक़्त है हम आने वाली पीढ़ियों के लिये सुखद अतीत बनें…..! पेड़ों की रक्षा करें, अपनी प्रवृत्ति प्रकृति के अनुरूप रखें, शाकाहारी बनें, जीवों पर दया करें….! असहायों की मदद करें ताकि वो जीने के काबिल बन सकें ।
विश्व पृथ्वी दिवस 2021 की थीम है – ‘Restore our Earth’ । इसका उद्देश्य है प्राकृतिक, हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना । हम सभी को हमारे ग्रह के लिए सकारात्मक कार्रवाई के लिए इस अभियान में अपनी भागीदारी करनी चाहिए। आइए, इस खास अवसर पर हम सब मिलकर भावी पीढ़ियों के लिए वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने, अपने आस-पास सफाई रखने एवं धरती को हरी-भरी व सुंदर बनाने का संकल्प लें।
पृथ्वी को बचाने के लिए एक पेड़ जरूर लगाएं और कोशिश करें कि पीपल, बरगद, नीम,तुलसी और बांस के पेड लगाएं क्योंकि पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है ,बरगद 80% तथा नीम 75% है । ऑक्सीजन बनाने का काम पेड़ की पत्तियां करती हैं जो एक घंटे में पांच मिलीलीटर ऑक्सीजन बनाती हैं। इसलिए जिस पेड़ में ज्यादा पत्तियां होती हैं वो पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बनाता है। पीपल का पेड़ अन्य पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन देता है यह दिन में 22 घंटे से भी ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। हवा को फ्रेश करने में बांस का पेड़ काम आता है। अन्य पेड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। नीम, बरगद, तुलसी के पेड़ भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं। नीम, बरगद, तुलसी के पेड़ एक दिन में 20 घंटों से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। बड, शीशम, पीपल, आम और सफेदा के वृक्ष भूमि जल संचयन के लिए लगाने चाहिए। बड़, शीशम, पीपल व आम इन पेड़ों की जड़ें भूमि में सीधी नीचे तक फैली होती है, जबकि सफेदे की जड़ भूमि की ऊपरी सतह तक होती है। इसलिए सफेदा की जड़ से पानी छन कर नीचे तक जाता है तथा बड़, शीशम, पीपल और आम की जड़ भूजल को बरकरार रखने के लिए सहायक होती है। यूकेलिप्टस और अन्य सजावटी वृक्ष लगाने से ये काफी मात्रा में जल भूमि से सोख लेते हैं, इन्हें कम लगाया जाना चाहिए । वातावरण को स्वच्छ और वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए तुलसी और पीस लिली का पौधा घर में लगाना चाहिए।
जब हम इन जीवनदायिनी पेडों को ज्यादा से ज्यादा लगाएंगे तभी हम एक स्थायी भविष्य के लिए अग्रसर हो पाएंगे ।

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विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….!!🌳🌲🌱🌴🌳🌲