बची रहे पृथ्वी…🌱🌱🌱

स्कूल में सिखाई जाने वाली एक बात मुझे आज याद आ रही है जब हमें सिखाया जाता था कि पृथ्वी की ऐसी ही स्थिति रही तो देखना एक दिन पानी भी खरीदना पड़ेगा तब हम सबने इस बात को मज़ाक में उड़ा दिया था लेकिन आज सचमुच बंद बोतल में पानी बिक रहा है और तो और आज तो उससे भी भयावह स्थिति से हम गुजर रहे हैं । जो हवा प्रकृति हमे निःशुल्क देती है वो हवा (आक्सीजन) भी अब बिकनी शुरु हो गई है लोग आक्सीजन सिलेंडर के लिए भाग रहे हैं …!! ये सब बातें इंगित करती हैं कि हम हर बीतते दिन के साथ जलवायु संकट से जूझ रहे हैं। ये दिवस हमें ये चेतावनी दे रहा है कि आज जिन समस्याओं से मानव जीवन गुजर रहा है वो भविष्य में और भयावह होंगी अगर हम धरा के प्रति सचेत न रहे तो सब कुछ धरा का धरा रह जायेगा |
आज एक कोरोना नामक बीमारी ने संसार की सम्पूर्ण मानव प्रजाति को हिला के रख दिया है ,सभी जगह ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है । इसी तरह कल अनेकों बीमारी जन्म लेंगी इसलिये अभी भी वक़्त है हम आने वाली पीढ़ियों के लिये सुखद अतीत बनें…..! पेड़ों की रक्षा करें, अपनी प्रवृत्ति प्रकृति के अनुरूप रखें, शाकाहारी बनें, जीवों पर दया करें….! असहायों की मदद करें ताकि वो जीने के काबिल बन सकें ।
विश्व पृथ्वी दिवस 2021 की थीम है – ‘Restore our Earth’ । इसका उद्देश्य है प्राकृतिक, हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना । हम सभी को हमारे ग्रह के लिए सकारात्मक कार्रवाई के लिए इस अभियान में अपनी भागीदारी करनी चाहिए। आइए, इस खास अवसर पर हम सब मिलकर भावी पीढ़ियों के लिए वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने, अपने आस-पास सफाई रखने एवं धरती को हरी-भरी व सुंदर बनाने का संकल्प लें।
पृथ्वी को बचाने के लिए एक पेड़ जरूर लगाएं और कोशिश करें कि पीपल, बरगद, नीम,तुलसी और बांस के पेड लगाएं क्योंकि पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है ,बरगद 80% तथा नीम 75% है । ऑक्सीजन बनाने का काम पेड़ की पत्तियां करती हैं जो एक घंटे में पांच मिलीलीटर ऑक्सीजन बनाती हैं। इसलिए जिस पेड़ में ज्यादा पत्तियां होती हैं वो पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बनाता है। पीपल का पेड़ अन्य पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन देता है यह दिन में 22 घंटे से भी ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। हवा को फ्रेश करने में बांस का पेड़ काम आता है। अन्य पेड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। नीम, बरगद, तुलसी के पेड़ भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं। नीम, बरगद, तुलसी के पेड़ एक दिन में 20 घंटों से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। बड, शीशम, पीपल, आम और सफेदा के वृक्ष भूमि जल संचयन के लिए लगाने चाहिए। बड़, शीशम, पीपल व आम इन पेड़ों की जड़ें भूमि में सीधी नीचे तक फैली होती है, जबकि सफेदे की जड़ भूमि की ऊपरी सतह तक होती है। इसलिए सफेदा की जड़ से पानी छन कर नीचे तक जाता है तथा बड़, शीशम, पीपल और आम की जड़ भूजल को बरकरार रखने के लिए सहायक होती है। यूकेलिप्टस और अन्य सजावटी वृक्ष लगाने से ये काफी मात्रा में जल भूमि से सोख लेते हैं, इन्हें कम लगाया जाना चाहिए । वातावरण को स्वच्छ और वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए तुलसी और पीस लिली का पौधा घर में लगाना चाहिए।
जब हम इन जीवनदायिनी पेडों को ज्यादा से ज्यादा लगाएंगे तभी हम एक स्थायी भविष्य के लिए अग्रसर हो पाएंगे ।

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विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….!!🌳🌲🌱🌴🌳🌲

स्नेह-पर्व ‘रक्षाबंधन’ आज के परिपेक्ष्य में…

भाई – बहन का रिश्ता मां और संतान के बाद दुनिया का शायद सबसे खूबसूरत रिश्ता होता है। एक ऐसा रिश्ता जिसकी अभिव्यक्ति के तरीके बहनों की उम्र के साथ बदलते रहते हैं। बहनों का पूरा बचपन अपने भाईयों से लड़ते-झगड़ते बीत जाता है। साथ रहें, साथ खाएं, साथ सोएं या साथ खेलें – एकदम दुश्मनों वाला सलूक ! राखी के दिन मिठाई खिलाने के बाद भी नेग के लिए झगड़ा। फिर लड़ते-झगड़ते हम बहनें जाने कब सयानी हो जाती हैं और भाईयों की फ़िक्र करने लगती हैं। ब्याह के बाद ससुराल जाकर वे भाईयों को अपनी प्रार्थना और प्रतीक्षा में शामिल कर लेती हैं। राखी के दिन भाईयों का इंतज़ार करती हैं। बूढ़ी हुई तो बहन से सीधे मां की भूमिका में उतर आती हैं। बूढ़े भाईयों को बात-बात में स्नेह-भीगी हिदायतें और डांट-फटकार ! ये तो थी पारम्परिक राखी और बहन के प्यार की बात ।
आज बदलते परिवेश में हम सबको रक्षाबंधन के स्वरूप को इससे ऊपर भी सोचना है वो यह कि जो बहन कमज़ोर हो तो भाई उसकी मज़बूती बन जाए । जब भाई कमज़ोर हो तो बहन उसकी मज़बूती बन जाए । जब भाई बहन कमज़ोर हों तो परिवार उनकी मज़बूती बन जाए । जब परिवार कमज़ोर हो तो समाज उनकी मज़बूती बन जाए । हमें ऐसे ही तो रक्षाबंधन मनाना होगा । यह ज़रूरी नही की हमेशा बहन की रक्षा ही ज़रूरी है, बहुत बार बहन भी भाई की रक्षा ज़्यादा बेहतर कर सकती हैं ।
हाथों पर बंधने वाली राखी दोनों को बराबर कर्तव्य और अधिकार देती है । इनमें से जिसे भी रक्षा की ज़रूरत होगी,दूसरा उसके सामने अपने को हमेशा समर्पित करेगा ।
रक्षाबंधन एक डोर है, जो परिवार को जोड़ती है, एक धागा है, जो परिवार को बुनता है । एक खलिस मोहब्बत में डूबी रस्म है, जो कहती है, अपनी जान की बाज़ी लगा दो मगर इस बंधन में बंधे रिश्ते और इंसान को बचाने से पीछे मत हटो ।

रक्षाबंधन हमसे कहता है, जिसको ज़रूरत पड़े उसके लिए आप मज़बूती से खड़े हो । यह भाई का बहन के लिए खड़ा होना पहली व्याख्या तो हो सकता है मगर दर्शन कहता है कि जो कमज़ोर हो,जिसे ज़रूरत हो,उसके लिए वह खड़ा होए,जो मज़बूत है । कमज़ोर और मज़बूत भाई बहन दोनों हो सकते हैं, इसलिए इसको और बड़े नज़रिए से देखें और जाने,ज़रूरत पर हमें अपना कर्तव्य निभाना है, चाहे हम बहन हों या भाई ।
ईश्वर यह बीमारी भरा कोरोनाकाल जल्द खत्म करे, यह प्रार्थना है। इस रक्षाबंधन हम सबकी एक राखी समस्त देश को भी होनी चाहिए । जहाँ जो भी देशवासी कमज़ोर और असहाय हो, उसकी मदद और उसे सेहत के साथ ज़िन्दा रखने का हम सभी समेत हर मज़बूत व्यक्ति का कर्तव्य है । एक दूसरे के साथ खड़े होइए । बिना रँग,जाति,धर्म,वर्ग के भेद के रक्षा का एक धागा उनसे बंधवा लीजिये,जिन्हें आपकी ज़रूरत है । आज के परिपेक्ष्य में ऐसा रक्षाबंधन मनाने में ही सार्थकता है ।

सभी लोगों को रक्षाबंधन की बहुत बहुत बधाई💐💐💐