स्नेह-पर्व ‘रक्षाबंधन’ आज के परिपेक्ष्य में…

भाई – बहन का रिश्ता मां और संतान के बाद दुनिया का शायद सबसे खूबसूरत रिश्ता होता है। एक ऐसा रिश्ता जिसकी अभिव्यक्ति के तरीके बहनों की उम्र के साथ बदलते रहते हैं। बहनों का पूरा बचपन अपने भाईयों से लड़ते-झगड़ते बीत जाता है। साथ रहें, साथ खाएं, साथ सोएं या साथ खेलें – एकदम दुश्मनों वाला सलूक ! राखी के दिन मिठाई खिलाने के बाद भी नेग के लिए झगड़ा। फिर लड़ते-झगड़ते हम बहनें जाने कब सयानी हो जाती हैं और भाईयों की फ़िक्र करने लगती हैं। ब्याह के बाद ससुराल जाकर वे भाईयों को अपनी प्रार्थना और प्रतीक्षा में शामिल कर लेती हैं। राखी के दिन भाईयों का इंतज़ार करती हैं। बूढ़ी हुई तो बहन से सीधे मां की भूमिका में उतर आती हैं। बूढ़े भाईयों को बात-बात में स्नेह-भीगी हिदायतें और डांट-फटकार ! ये तो थी पारम्परिक राखी और बहन के प्यार की बात ।
आज बदलते परिवेश में हम सबको रक्षाबंधन के स्वरूप को इससे ऊपर भी सोचना है वो यह कि जो बहन कमज़ोर हो तो भाई उसकी मज़बूती बन जाए । जब भाई कमज़ोर हो तो बहन उसकी मज़बूती बन जाए । जब भाई बहन कमज़ोर हों तो परिवार उनकी मज़बूती बन जाए । जब परिवार कमज़ोर हो तो समाज उनकी मज़बूती बन जाए । हमें ऐसे ही तो रक्षाबंधन मनाना होगा । यह ज़रूरी नही की हमेशा बहन की रक्षा ही ज़रूरी है, बहुत बार बहन भी भाई की रक्षा ज़्यादा बेहतर कर सकती हैं ।
हाथों पर बंधने वाली राखी दोनों को बराबर कर्तव्य और अधिकार देती है । इनमें से जिसे भी रक्षा की ज़रूरत होगी,दूसरा उसके सामने अपने को हमेशा समर्पित करेगा ।
रक्षाबंधन एक डोर है, जो परिवार को जोड़ती है, एक धागा है, जो परिवार को बुनता है । एक खलिस मोहब्बत में डूबी रस्म है, जो कहती है, अपनी जान की बाज़ी लगा दो मगर इस बंधन में बंधे रिश्ते और इंसान को बचाने से पीछे मत हटो ।

रक्षाबंधन हमसे कहता है, जिसको ज़रूरत पड़े उसके लिए आप मज़बूती से खड़े हो । यह भाई का बहन के लिए खड़ा होना पहली व्याख्या तो हो सकता है मगर दर्शन कहता है कि जो कमज़ोर हो,जिसे ज़रूरत हो,उसके लिए वह खड़ा होए,जो मज़बूत है । कमज़ोर और मज़बूत भाई बहन दोनों हो सकते हैं, इसलिए इसको और बड़े नज़रिए से देखें और जाने,ज़रूरत पर हमें अपना कर्तव्य निभाना है, चाहे हम बहन हों या भाई ।
ईश्वर यह बीमारी भरा कोरोनाकाल जल्द खत्म करे, यह प्रार्थना है। इस रक्षाबंधन हम सबकी एक राखी समस्त देश को भी होनी चाहिए । जहाँ जो भी देशवासी कमज़ोर और असहाय हो, उसकी मदद और उसे सेहत के साथ ज़िन्दा रखने का हम सभी समेत हर मज़बूत व्यक्ति का कर्तव्य है । एक दूसरे के साथ खड़े होइए । बिना रँग,जाति,धर्म,वर्ग के भेद के रक्षा का एक धागा उनसे बंधवा लीजिये,जिन्हें आपकी ज़रूरत है । आज के परिपेक्ष्य में ऐसा रक्षाबंधन मनाने में ही सार्थकता है ।

सभी लोगों को रक्षाबंधन की बहुत बहुत बधाई💐💐💐