आ अब लौट चलें..📘📒📙

यूनेस्कों ने 23 अप्रैल 1995 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी. पेरिस में यूनेस्को की एक आमसभा में फैसला लिया गया था कि दुनिया भर के लेखकों का सम्मान और श्रद्धांजली देने व किताबों के प्रति रुचि जागृत करने के लिए हर साल विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाएगा ।
23 अप्रैल को वर्ल्ड बुक डे के रूप में मनाने की एक वजह ये भी है कि इस दिन कई प्रमुख लेखक या पैदा हुए थे या उनकी मृत्यु हो गई थी. विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का 23 अप्रैल को निधन हुआ था जबकि मैनुएल मेजिया वल्लेजो और मौरिस ड्रून 23 अप्रैल के दिन पैदा हुए थे. 23 अप्रैल 1564 को एक ऐसे लेखक दुनिया से अलविदा हुए, जिनकी कृतियों का विश्व की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया गया है। जिसने अपने जीवन काल में करीब 35 नाटक और 200 से अधिक कविताएं लिखीं। यह लेखक थे शेक्सपीयर। साहित्य जगत में शेक्सपीयर का जो स्थान है उसे देखते हुए ही यूनेस्को ने 1945 से विश्व पुस्तक दिवस का आयोजन शुरू किया।भारत सरकार ने 2001 से इस दिन को मनाने की घोषणा की।

पिछले एक वर्ष से हम सब कोरोनाकाल होने के कारण ज्यादातर समय घर पर ही बिता रहे है और बाहर जाना सीमित करना पड़ा है। घर में हमारे पास हमारे सच्चे मित्र के रूप में किताबें जरूर मौजूद हैं जरूरत है तो बस उन्हे बुक शेल्फ़ के अंधेरे से निकाल कर, उनके साथ अपना समय व्यतीत करने की । यह समय पढ़ने के महत्व का जश्न मनाने का समय है।लॉकडाउन के इस अकेलेपन के समय में किताबें मनोरंजन के साथ जानकारी का अहम जरिया भी हैं तो आईये किताबों की ओर लौटें क्योंकि अभी पिछले कुछ सालों से किताबों पर संकट का समय चल रहा है। इसका कारण है पिछले दशकों में किताबों के विकल्प के तौर पर मोबाइल और इंटरनेट की तेजी से फ़ैल रही दृश्यात्मकता ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया है। यह बच्चों को ही नहीं, बड़ों को भी समाज से काटकर अकेला करता जा रहा है। इसके कारण हम में से कई लोग आसपास की दुनिया में दिलचस्पी खोने लगे हैं। बहुत सारे मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को अवसाद से बचाने के लिए उन्हें फिर किताबों की दुनिया में लौटने की जरुरत है। बच्चों की सोच और कल्पना-शक्ति को बढाने में बाल साहित्य बड़ी भूमिका होती है। यह हम सबका दायित्व है कि बच्चों को मोबाइल और टेलीविज़न के ज्यादा इस्तेमाल से बचाकर उन्हें अच्छी किताबों और शिक्षाप्रद कॉमिक्स की ओर मोड़ें। हम खुद उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो बच्चे निश्चित रूप से हमारा अनुकरण करेंगे।
सुना है किताबें आपको जीवन का दर्शन करवाने के साथ साथ आपको अपने आप से भी मिलवाती है, जैसे ही हम उन्हें अपनी बुक शेल्फ़ के अंधरे से निकालेंगे,वैसे ही वे हमारे जीवन के बहुत से अंधकार भरे रास्तों को उजालों से भर देंगी…..। वो कहते हैं ना कि हर एक दोस्त जरूरी होता है… किताबें बहुत अच्छी दोस्त होती हैं..हमारे अकेलेपन की साथी..हमारे एकांत की हमसफर..ये बेहद सुकून देती हैं… ….,!
तो आ अब लौट चलें…..किताबों की दुनिया की ओर📚📙

जब हम घिरे होते हैं अनिश्चितताओं से,
किताबें रास्ता बन जाती हैं
जब हम घिरे होते हैं डर से,
किताबें उम्मीद बन जाती हैं
जब हम होते हैं एकाकी
किताबें यार बन जाती हैं…!!

विश्व पुस्तक दिवस पर

‘I LOVE IT’ एक दृष्टिकोण….

एक महिला जो 80 वर्ष से अधिक उम्र की थी, अच्छी तरह से कपड़े पहनने, मेकअप लगाने और सुंदर पैटर्न में अपने बालों को व्यवस्थित करने की दिशा में बहुत सुरुचि थी।

उनकी और उनके पति की शादी को लगभग 60 साल हो गए थे।

अपने प्यारे साथी के जाने के बाद, उसकी देखभाल करने के लिए कोई संतान और परिवार में कोई नहीं था।
उसने एक नर्सिंग होम में जाने का फैसला किया।

उस दिन भी, जब उसने अपने घर को अच्छे के लिए खाली किया, तो उसने सुंदर कपड़े पहने और बहुत खूबसूरत लग रही थी।

नर्सिंग होम पहुंचने के बाद, उसे अपने कमरे के तैयार होने के लिए लॉबी में धैर्यपूर्वक इंतजार करना पड़ा।

जब एक परिचारिका उसे कमरे में ले जाने के लिए आई, तो उसने महिला को उस छोटे से स्थान का वर्णन किया जहां उसे रहने के लिए इस्तेमाल करना था।

“मैं इसे प्यार करती हूँ,” महिला ने आठ साल की उम्र के बच्चे को उत्साह के साथ व्यक्त किया, जिसने अभी एक नया पिल्ला उपहारस्वरूप प्रस्तुत किया था।

“श्रीमती जोन्स, आपने अभी तक कमरा भी नहीं देखा है … बस प्रतीक्षा करें,” परिचारक ने टिप्पणी की।

“ठीक है, मेरी खुशी का कमरे से कोई लेना-देना नहीं है,” महिला ने जवाब दिया।

“मुझे कमरा पसंद है या नहीं, इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि फर्नीचर की व्यवस्था कैसे की गई है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मैं अपने दिमाग की व्यवस्था कैसे करती हूं, खुशी ऐसी चीज है जिसे आप समय से पहले तय कर सकते हैं। और मैंने पहले ही अपने कमरे को , मेरे आसपास के लोगों को, मेरे जीवन को प्यार करने के लिए फैसला किया हुआ है । यह एक निर्णय है जो मैं हर सुबह उठने पर लेती हूं। जब आप जागते हैं, तो आप जानते हैं कि हमारे पास सबसे बड़ी संपत्ति , यह चुनने की शक्ति है कि हम कैसा महसूस करते हैं। “

महिला ने बोलना जारी रखा, क्योंकि उपस्थित व्यक्ति ने उसके मुखाग्र बिंदु से बोली गई बातों को ध्यानपूर्वक सुना।

“मैं अपना पूरा दिन बिस्तर में उस दर्द के बारे में सोचकर बिता सकती हूं, इससे मैं अपने शरीर के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं, जो अब काम नहीं कर रहे हैं या दर्द दे रहे है या मैं बिस्तर से बाहर निकल सकती हूं और उन हिस्सों के लिए आभारी हो सकती हूं जो काम करते हैं। प्रत्येक काम एक उपहार है, और जब तक मेरी आँखें अभी भी खुली हुई हैं, मैं आज पर ध्यान देना जारी रखूंगी और उन सभी सुखद यादों को जो मैंने मेरे जीवन में अपने दिमाग में इस समय के लिए संजो कर रखी हैं । “

उपस्थित महिला बुजुर्ग महिला के सकारात्मक दृष्टिकोण से चकित थी, जिसका जीवन एक बाहरी दृष्टिकोण से, केवल समस्याओं और निराशा से भरा था।

वास्तव में,
समस्याएं एक और सभी को आती हैं।
संघर्ष करते समय आनंदित रहना हमारी पसंद है ।

घृणा बार-बार आती है।
जो हमें करना चाहिए वह प्यार है….

नकारात्मकता हमारे दरवाजे पर प्रतिदिन दस्तक देती है।
सकारात्मक दृष्टिकोण हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

शिकायत अपने आप आती है।
कृतज्ञता एक विकल्प है जिसे हम सभी को अपनाना है।

यह कहना ‘I LOVE IT’ एक दृष्टिकोण है जो आपमें पहले से मौजूद जीने के तरीके को और बेहतर बनाता है।

शिक्षक…..


सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ,
नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ!
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी,
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ!
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के,
मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ !
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा,
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ!

हम सभी को शिक्षक कई रूप में मिलते हैं, कई प्रारूप में मिलते हैं। उनके पढ़ाने से हम शून्य से मूल्य में परिवर्तित होते हैं। वे अपनी अमुल्य शिक्षा हममें गढ़ते हैं…यूँ ही नहीं हम उन्हें पूज्य कहते हैं। माता-पिता प्रारम्भिक शिक्षक होते हैं तो विद्यालय आते ही प्राथमिक शिक्षक मिलते हैं। यद्यपि, हर शिक्षक का पढ़ाने का तरीक़ा अलग अलग होता है परंतु उनके शिक्षण को हम जीवन के अलग-अलग अनुभवों में घुला हुआ पाते हैं….भिन्न परिस्थितियों के प्रश्न में खड़ा पाते हैं और हर दशा में उत्तर पाने की दिशा में प्रेरित करते पाते हैं । एक शिक्षक का महत्व जन्मदाता के सामान होता है क्यूंकि वह व्यक्ति को जीवन जीने का ज्ञान प्रदान करता है । जैसे कुछ ने हमें साहित्य का वर्ण सिखाया तो कुछ ने हमें विज्ञान की दुनिया की सैर कराई। कुछ ने गणित का मान बताया, कुछ ने हमें भूगोल, इतिहास से सजाया । स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक के अलावा ऐसे कई लोग हमारे आस पास होते हैं जिनसे हम व्यावहारिक ज्ञान की सीख लेते हैं। आज अवसर है हर छोटी या बड़ी शिक्षा देने वाले गुरुजनों को अभिवादन करने का और उनसे मिली हर उस सीख को प्रणाम करने का जिनसे जीवन का आधार बना।
मेरे अन्दर जिज्ञासा का बीज बोने और मेरी कल्पना को प्रज्ज्वलित करने के लिए ताकि मैं जीवन में आगे बढ़ सकूँ और सफलता प्राप्त कर सकूँ मैं आपकी तहे दिल से आभारी हूँ ।
गुरु अनंत तक जानिए, गुरु की ओर न छोर,
गुरु प्रकाश का पुंज है, निशा बाद का भोर।

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं🙏🌷